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Editor-in-Chief Special Edition

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Prof. Rakesh Kumar Yogi

Chairperson

Department of Indian Knowledge & languages, Gurugram University Gurugram 

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Dr. Supriya Sanju

Adjunct Professor

Department of Indian Knowledge and Languages, Gurugram University Gurugram

Dr Ravi Prakash Chaubey

Assistant Professor

Department of Indian Knowledge and Languages

Gurugram University, Gurugram

Dr Anupam Anand

Assistant Professor

Department of Indian Knowledge and Languages

Gurugram University, Gurugram

Dr Pawan Kumar Upadhyay

Assistant Professor

Department of Indian Knowledge and Languages

Gurugram University, Gurugram

Editorial Bord Member for Special Edition

प्रस्तावना

अभिनवधारा जर्नलविशेषांक – मार्च 2026“श्रीमद्भगवद्गीता: भारतीय ज्ञान परम्परा (IKS) के लिए एक दार्शनिक एवं व्यावहारिक मार्गदर्शक”श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय ज्ञान परम्परा (Indian Knowledge System – IKS) का एक ऐसा अमूल्य ग्रंथ है, जो मानव जीवन के गहनतम प्रश्नों—अस्तित्व, कर्तव्य, चेतना और मोक्ष—का समाधान प्रस्तुत करता है। महाभारत के भीष्मपर्व में निहित यह दिव्य संवाद अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से परे जाकर सार्वकालिक और सार्वभौमिक महत्व प्राप्त करता है।अभिनवधारा जर्नल का यह विशेषांक (मार्च 2026) गीता के बहुआयामी स्वरूप का भारतीय ज्ञान परम्परा के संदर्भ में पुनर्पाठ करने का एक विनम्र प्रयास है। इस अंक का उद्देश्य प्राचीन ज्ञान और समकालीन विमर्श के मध्य सेतु का निर्माण करना है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि गीता की शिक्षाएँ आज भी नैतिकता, शिक्षा, नेतृत्व, मनोविज्ञान, आध्यात्मिकता तथा सतत् विकास जैसे विविध क्षेत्रों में समान रूप से प्रासंगिक हैं।गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि एक सजीव संवाद है—भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के मध्य—जो मानव जीवन की जटिलताओं और दुविधाओं का समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें प्रतिपादित कर्म, ज्ञान और भक्ति के सिद्धांत जीवन को समग्र दृष्टि प्रदान करते हैं, जहाँ विचार, आचरण और भावना का संतुलित समन्वय दिखाई देता है। वर्तमान युग, जो अनिश्चितताओं और नैतिक चुनौतियों से परिपूर्ण है, उसमें गीता एक स्थिर दार्शनिक आधार और व्यावहारिक दिशा प्रदान करती है।इस विशेषांक में विभिन्न विद्वानों, शोधकर्ताओं एवं विशेषज्ञों के शोधपत्रों को संकलित किया गया है, जो गीता के विविध आयामों—दार्शनिक चिंतन, व्याख्यात्मक परम्पराएँ, शिक्षण पद्धति तथा समकालीन संदर्भों में उसकी उपयोगिता—का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। भारतीय ज्ञान परम्परा के व्यापक परिप्रेक्ष्य में गीता का यह पुनर्पाठ इसे एक जीवंत और सतत् प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित करता है।इस प्रकाशन को संभव बनाने में सहयोग देने वाले सभी लेखकों, समीक्षकों तथा संपादकीय मंडल के सदस्यों के प्रति हम हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं। साथ ही, हम अपने पाठकों एवं अकादमिक जगत के प्रति भी कृतज्ञ हैं, जिनके सतत् सहयोग से अभिनवधारा जर्नल निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।हमें विश्वास है कि यह विशेषांक शोधार्थियों, अध्येताओं तथा विद्वानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ-सामग्री सिद्ध होगा तथा भारतीय ज्ञान परम्परा के अध्ययन एवं अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करेगा।

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Volume-2 (Hindi & Sanskrit)

Chief Editor Contact

Dr Supriya Sanju

Adjunct Professor, Department of Indian Knowledge & Languages

Gurugram University Gurugram

Phone: 9818244235 Email id: supriyasanju@gmail.

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