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                      भारतीय ज्ञान प्रणाली के वैदिक आधार : एक अध्ययन

जैकी कुमार चौबे

शोधछात्र, संस्कृत विभाग

दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली

Publication Type  -   Journal Article

Publication Year    -   2026

Journal Name   -   Abhinavdhara Journal

Volume/ Issue  -    Special Issue-Vol -2

Pagination -            203-210

Article Type   -       Research Paper

सारांश

भारतीय ज्ञान प्रणाली मानव सभ्यता की प्राचीनतम, सतत् और समग्र ज्ञान-परम्पराओं में से एक है, जिसकी जड़ें वैदिक साहित्य में निहित हैं। यह प्रणाली केवल भौतिक ज्ञान तक सीमित न होकर आध्यात्मिक, नैतिक, सामाजिक तथा दार्शनिक चेतना का समन्वित स्वरूप प्रस्तुत करती है। चारों वेद ज्ञान परम्परा के मूल स्रोत हैं, जिनमें प्रकृति, समाज, कर्म, यज्ञ, ऋत और ब्रह्म की अवधारणाएँ प्रतिपादित हैं। वैदिक विचारधारा का दार्शनिक विकास उपनिषदों में दृष्टिगोचर होता है, जहाँ कर्मकाण्ड से ज्ञानकाण्ड की ओर संक्रमण स्पष्ट दिखाई देता है। “तत्त्वमसि”[1], “अहं ब्रह्मास्मि”[2] तथा “प्रज्ञानं ब्रह्म”[3] जैसे महावाक्य आत्मा और ब्रह्म की अद्वैतात्मक सत्ता को उद्घाटित करते हैं। उदाहरणतः माण्डूक्य उपनिषद् का “अयमात्मा ब्रह्म”[4] कथन यह दर्शाता है कि समस्त जगत् ब्रह्मस्वरूप है, जो भारतीय ज्ञान प्रणाली की समग्रता को अभिव्यक्त करता है। इस प्रकार भारतीय ज्ञान प्रणाली के वैदिक आधार न केवल भारतीय संस्कृति की बौद्धिक पहचान निर्मित करते हैं, बल्कि समकालीन वैश्विक समस्याओं—जैसे पर्यावरण संरक्षण, नैतिक संकट और मानसिक स्वास्थ्य के समाधान हेतु भी प्रासंगिक दृष्टि प्रदान करते हैं। यह शोध भारतीय ज्ञान परम्परा की इसी सतत्, समन्वयात्मक और सार्वकालिक उपयोगिता को रेखांकित करता है।

मुख्यशब्द:- भारतीय ज्ञान प्रणाली, वेद, उपनिषद्, दर्शन, ऋत, धर्म, ब्रह्म, आत्मा

Chief Editor Contact

Dr Supriya Sanju

Adjunct Professor, Department of Indian Knowledge & Languages

Gurugram University Gurugram

Phone: 9818244235 Email id: supriyasanju@gmail.

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