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Special Edition- 2

VOL-2

​

 Abhinavdhara – IJIIS​

Explore the Special Edition-2 of Abhinavdhara (IJIIS) featuring peer-reviewed research articles on Indic Studies, Sanskrit, Indian Philosophy, and Culture.

 

SRIJANSHODH 2026

International conference on Indian Knowledge Systems, Art, Design, Wellness, and Cultural Heritage                 

 

Organised by ​

 Shabdārambh:

Global Academy of Art,Culture, Languages & Wellness Date: 29th & 30th August 2026 (virtual mode) 

गारो, ख़ासी एवं जयंतिया जनजातीय नृत्य परम्परा का अध्ययन

निवेदिता पाण्डेय
मंच कला संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी

परिचय
भारत के उत्तर-पूर्व में स्थित मेघालय राज्य अपने प्राकृतिक सौंदर्य, विविधता एवं अपनी जनजातीय परम्पराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ निवास करने वाली जनजातियों में से तीन प्रमुख जनजाति गारो, ख़ासी एवं जयंतिया जो कि यहाँ की पहाड़ियों पर निवास करती हैं, अपनी नृत्य परम्परा एवं नृत्य पर्वों के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके द्वारा किए जाने वाले नृत्य परम्पराओं में से तीन प्रमुख नृत्य जिसमें गारो जनजाति का वांगला नृत्य, ख़ासी जनजाति का शाद नोंगक्रेम नृत्य एवं जयंतिया जनजाति का लाहो नृत्य सम्मिलित है। किसी भी राज्य की नृत्य कला मनोरंजन का साधन मात्र न होकर उस जगह की संस्कृति का प्रतिबिंब भी होती है। किसी भी राज्य के विकास क्रम को हम इन पहलुओं पर माप सकते हैं, कि वहाँ रहने वाले लोगों की विचारधारा, उनकी संस्कृति एवं परम्परा की जड़े कितनी मज़बूत एवं विकसित हैं। यह शोध पत्र निम्नलिखित नृत्य शैलियों में प्रयोग होने वाली वेशभूषा, तकनीक एवं वाद्यों के विषय में है।

संकेत शब्द - जनजातीय नृत्य, मेघालय, वांगला, शाद नोंगक्रेम, लाहो

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