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Special Edition- 2

VOL-2

​

 Abhinavdhara – IJIIS​

Explore the Special Edition-2 of Abhinavdhara (IJIIS) featuring peer-reviewed research articles on Indic Studies, Sanskrit, Indian Philosophy, and Culture.

 

SRIJANSHODH 2026

International conference on Indian Knowledge Systems, Art, Design, Wellness, and Cultural Heritage                 

 

Organised by ​

 Shabdārambh:

Global Academy of Art,Culture, Languages & Wellness Date: 29th & 30th August 2026 (virtual mode) 

भारतीय आधुनिक विज्ञापन कला में उपभोक्ता मनोविज्ञान और दृश्य सौंदर्य का संबंध

Ravi Kant Pandey
Assistant Professor, Applied Art
College of Arts and Crafts, Lucknow, Faculty of Fine Art, University of Lucknow

Abstract

यह शोध-पत्र भारतीय आधुनिक विज्ञापन कला में उपभोक्ता के मनोविज्ञान का और उपभोक्ता को प्रभावित करने की दृष्टि से विज्ञापन कला में दृश्य सौंदर्य के परस्पर संबंध का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। वर्तमान डिजिटल युग में विज्ञापन केवल उत्पादों और सेवाओं के प्रचार का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह उपभोक्ताओं की भावनाओं और क्रय-निर्णयों को प्रभावित करने की दृष्टि से एक प्रभावशाली दृश्य संचार का माध्यम बन चुका है। शोध में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी विज्ञापन की प्रभावशीलता केवल उसके संदेश पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी कलात्मक प्रस्तुति रंग-संयोजन, टाइपोग्राफी, दृश्य प्रतीकों तथा सांस्कृतिक तत्वों के संतुलित उपयोग पर भी आधारित होती है। विज्ञापन के दृश्य सौंदर्य के आधार पर यह सभी तत्व उपभोक्ता के मन में आकर्षण, विश्वास और ब्रांड के प्रति सकारात्मक भावनाएँ उत्पन्न करते हैं। अध्ययन का उद्देश्य यह समझाना है कि दृश्य सौंदर्य के विभिन्न आयाम उपभोक्ताओं के ध्यान, भावनात्मक जुड़ाव, ब्रांड स्मृति तथा खरीद व्यवहार को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। इसके लिए गुणात्मक शोध पद्धति अपनाई गई है, जिसमें भारतीय प्रिंट, डिजिटल और सोशल मीडिया विज्ञापनों का दृश्य एवं विषयवस्तु विश्लेषण किया गया है। साथ ही विज्ञापन, सौंदर्यशास्त्र, दृश्य संचार और उपभोक्ता मनोविज्ञान से संबंधित साहित्य का समालोचनात्मक अध्ययन भी किया गया है। शोध में आधुनिक कला और विज्ञापन के अंतर्संबंध को भी रेखांकित किया गया है। क्यूबिज़्म, पॉप आर्ट, अतियथार्थवाद, मिनिमलिज़्म तथा अमूर्त अभिव्यक्तिवाद जैसी कला प्रवृत्तियों ने आधुनिक विज्ञापनों की दृश्य भाषा को समृद्ध बनाया है। इसके अतिरिक्त गेमीफिकेशन, ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), डिजिटल मीडिया तथा इंटरैक्टिव संचार जैसी नई तकनीकों ने उपभोक्ता के लिए विज्ञापन को अधिक सहभागी और अनुभवात्मक बनाया है। अतः यह कहा जा सकता है कि भारतीय आधुनिक विज्ञापन कला में दृश्य सौंदर्य केवल आकर्षण का साधन नहीं, बल्कि उपभोक्ता के मनोविज्ञान को समझने, उपभोक्ता से भावनात्मक संबंध स्थापित करने तथा उपभोक्ता से दीर्घकालिक ब्रांड पहचान को निर्मित करने का एक प्रभावी माध्यम है। भविष्य में विज्ञापन कला के क्षेत्र में सौंदर्यशास्त्र, उपभोक्ता मनोविज्ञान, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों तथा उभरती डिजिटल तकनीकों के समन्वित अध्ययन से अधिक प्रभावी, मानवीय और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील विज्ञापन रणनीतियों का विकास संभव होगा। यही इस अध्ययन का प्रमुख निष्कर्ष एवं योगदान है।

Keywords:- सौंदर्यशास्त्र, उपभोक्ता मनोविज्ञान, ब्रांड पहचान, गेमीफिकेशन, ऑगमेंटेड रियलिटी

Page No - 131-138

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