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An online refereed and peer reviewed journal

Special Edition- 2
VOL-1
Abhinavdhara – IJIIS
Explore the Special Edition-2 of Abhinavdhara (IJIIS) featuring peer-reviewed research articles on Indic Studies, Sanskrit, Indian Philosophy, and Culture.
SRIJANSHODH 2026
International conference on Indian Knowledge Systems, Art, Design, Wellness, and Cultural Heritage
Organised by
Shabdārambh:
Global Academy of Art,Culture, Languages & Wellness Date: 29th & 30th August 2026 (virtual mode)
उत्तराखंड की लोक कला ऐपण का कलात्मक अध्ययन
कुमकुम बिष्ट,
शोध छात्रा
विभाग- ललित कला, देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय, देहरादून
डॉ. सचिव गौतम,
शोध निर्देशक
विभाग- ललित कला, देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय, देहरादून
सारांश
ऐपण उत्तराखंड की एक पारंपरिक कला है, जिसका कुमाऊं क्षेत्र में विशेष स्थान है। यह उत्तराखंड की पारंपरिक लोक कला (चित्रकारी का रूप) है। इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व का एक बड़ा क्रम है। यह कुमाऊं की एक लोकप्रिय कला है, इसमें दीवारों,कागज और कपड़ों के टुकड़ों को विभिन्न ज्यामितीय आकृतियों और देवी-देवताओं तथा प्रकृति के वस्तुओं की आकृतियों के चित्रण से सजाया जाता है। इसे पूजा स्थलों, घरों और मुख्य प्रवेश द्वारों पर और आंगन के सामने बनाया जाता है। ऐपन को विभिन्न नामों से जाना जाता है और यह भारत के कई हिस्सों में बड़े रूपांतरों के साथ लोकप्रिय है (कौशिक, 207: 640)।
उत्तराखंड लोक कला ऐपण कुमाऊं क्षेत्र के अल्मोड़ा की एक प्राचीन और अनुष्ठानिक कला है, जो शुभ अवसरों और धार्मिक अनुष्ठानों में प्रमुख रूप से उपयोग की जाती है। यह कला प्राकृतिक वस्तुओं से बनाई जाती है जैसे चावल के पेस्ट और लाल मिट्टी (गेरू) मुख रूप से लाल और सफेद रंग का ही प्रयोग होता है, परंतु कहीं-कहीं पर अन्य रंगों का प्रयोग भी किया जाता है जिसके लिए फूलों की पंखुड़ियां,पेड़-पौधों की पत्तियां तथा हल्दी आदि का प्रयोग भी होता है, इसमें ज्यादातर ज्यामितीय आकर बनाए जाते हैं और यह कला नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके देवी-देवताओं का आह्वान करती है। फर्श और भूमि पर बनने वाली यह कला अब ऑयल पेंट, कागज और कैनवस तक पहुंच चुकी है। इसके संरक्षण और विकास के लिए इस पर अधिक से अधिक कार्य प्रयास की आवश्यकता है (आर्य,2022:483-488) ।
Keywords: ऐपण, उत्तराखंड, अनुष्ठानिक कला, ज्यामितीय
Page No- 49-56
https://doi.org/10.67754/ijiis.special.edi 2.vol01.003
सारांश
ऐपण उत्तराखंड की एक पारंपरिक कला है, जिसका कुमाऊं क्षेत्र में विशेष स्थान है। यह उत्तराखंड की पारंपरिक लोक कला (चित्रकारी का रूप) है। इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व का एक बड़ा क्रम है। यह कुमाऊं की एक लोकप्रिय कला है, इसमें दीवारों,कागज और कपड़ों के टुकड़ों को विभिन्न ज्यामितीय आकृतियों और देवी-देवताओं तथा प्रकृति के वस्तुओं की आकृतियों के चित्रण से सजाया जाता है। इसे पूजा स्थलों, घरों और मुख्य प्रवेश द्वारों पर और आंगन के सामने बनाया जाता है। ऐपन को विभिन्न नामों से जाना जाता है और यह भारत के कई हिस्सों में बड़े रूपांतरों के साथ लोकप्रिय है (कौशिक, 207: 640)।
उत्तराखंड लोक कला ऐपण कुमाऊं क्षेत्र के अल्मोड़ा की एक प्राचीन और अनुष्ठानिक कला है, जो शुभ अवसरों और धार्मिक अनुष्ठानों में प्रमुख रूप से उपयोग की जाती है। यह कला प्राकृतिक वस्तुओं से बनाई जाती है जैसे चावल के पेस्ट और लाल मिट्टी (गेरू) मुख रूप से लाल और सफेद रंग का ही प्रयोग होता है, परंतु कहीं-कहीं पर अन्य रंगों का प्रयोग भी किया जाता है जिसके लिए फूलों की पंखुड़ियां,पेड़-पौधों की पत्तियां तथा हल्दी आदि का प्रयोग भी होता है, इसमें ज्यादातर ज्यामितीय आकर बनाए जाते हैं और यह कला नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके देवी-देवताओं का आह्वान करती है। फर्श और भूमि पर बनने वाली यह कला अब ऑयल पेंट, कागज और कैनवस तक पहुंच चुकी है। इसके संरक्षण और विकास के लिए इस पर अधिक से अधिक कार्य प्रयास की आवश्यकता है (आर्य,2022:483-488) ।

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