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रघुवंश महाकाव्य में वर्णित आनंद प्राप्ति के उपाय

डॉ. ज्योति

सह – प्राध्यापिका, संस्कृत विभाग, जानकी देवी मेमोरियल महाविद्यालय

Abhinavdhara: International Journal of Innovation in Indic Studies

Volume-4

Issue: 1

Publication year-2026

सारांश:
भारतीय साहित्यिक एवं दार्शनिक परंपरा में ‘आनन्द’ मानव जीवन के परम उद्देश्यों और जीवन-मूल्यों से संबद्ध एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। महाकवि कालिदास द्वारा रचित रघुवंश महाकाव्य में राजधर्म, लोककल्याण, कर्तव्य, त्याग, संयम, प्रेम, परिवार, प्रकृति तथा आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से आनन्दमय जीवन की व्यापक दृष्टि प्रस्तुत होती है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य रघुवंश में वर्णित उन जीवन-मूल्यों एवं आचरण-पद्धतियों का विश्लेषण करना है, जिनके माध्यम से व्यक्ति स्थायी एवं सार्थक आनन्द की प्राप्ति कर सकता है। महाकाव्य के विभिन्न सर्गों में वर्णित रघुवंशी राजाओं के चरित्र, उनके कर्तव्यपरायण जीवन, प्रजावत्सलता, धर्मनिष्ठा, त्याग एवं आत्मसंयम का अध्ययन करते हुए यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि कालिदास के लिए आनन्द केवल भौतिक सुख अथवा इन्द्रिय-तृप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्तव्य, धर्म, लोकसेवा, प्रेम, त्याग और आत्मिक संतोष के समन्वय से उत्पन्न होने वाली जीवनगत अनुभूति है। रघुवंश में राजा और प्रजा के संबंध, पारिवारिक जीवन, दाम्पत्य प्रेम तथा प्रकृति के साथ मानव के सामंजस्य में भी आनन्द के विविध आयाम दृष्टिगत होते हैं। अध्ययन से यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि कालिदास की आनन्द-दृष्टि व्यक्ति के व्यक्तिगत सुख को सामाजिक एवं नैतिक उत्तरदायित्व से जोड़ती है। इस प्रकार रघुवंश महाकाव्य में प्रतिपादित आनन्द की अवधारणा समकालीन जीवन में संतुलन, नैतिकता, कर्तव्यबोध और लोककल्याण की प्रेरणा प्रदान करने में भी प्रासंगिक है।

Keywords- रघुवंश, कालिदास, आनन्द, जीवन-मूल्य, राजधर्म, लोककल्याण, त्याग, आत्मसंयम, धर्म, भारतीय काव्यशास्त्र

Page Number-21-33

10.67754/ijiis.vol4.issue.01.003

How to cite ?-Jyoti, D. (2026). Raghuvaṃśa Mahākāvya Meṃ Varṇita Ānanda Prāpti ke Upāya. Abhinavdhara: International Journal of Innovation in Indic Studies, 4(1), 21-33. https://doi.org/10.67754/ijiis.vol4.issue.01.003

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