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Special Edition- 2

VOL-2

​

 Abhinavdhara – IJIIS​

Explore the Special Edition-2 of Abhinavdhara (IJIIS) featuring peer-reviewed research articles on Indic Studies, Sanskrit, Indian Philosophy, and Culture.

 

SRIJANSHODH 2026

International conference on Indian Knowledge Systems, Art, Design, Wellness, and Cultural Heritage                 

 

Organised by ​

 Shabdārambh:

Global Academy of Art,Culture, Languages & Wellness Date: 29th & 30th August 2026 (virtual mode) 

पारंपरिक कुम्हारी कला में कार्यरत महिलाओं की स्थिति


शिवांगी गुप्ता
शोध छात्रा ,पॉटरी सिरामिक, मूर्तिकला विभाग
दृश्य कला संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी

सारांश
मृद्भांड कला भारत की प्राचीनतम कला परंपराओं में से एक है, जो पारंपरिक ज्ञान, सांस्कृतिक विरासत एवं लोकजीवन का अभिन्न अंग रही है। इस कला के संरक्षण, संवर्धन तथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। महिलाएँ अपने दैनिक घरेलू कार्यों के साथ-साथ मिट्टी के चयन एवं तैयारी, मृद्भांडों के निर्माण, अलंकरण, रंग-सज्जा, मूर्तियों एवं उपयोगी वस्तुओं के सजावटी कार्य, भट्ठी से संबंधित सहायक कार्यों तथा उत्पादों के विपणन तक विभिन्न स्तरों पर सक्रिय योगदान देती हैं। इसके बावजूद उनके श्रम को प्रायः उचित आर्थिक मूल्य, औपचारिक पहचान तथा सामाजिक सम्मान प्राप्त नहीं हो पाता । वर्तमान समय में डिज़ाइन नवाचार, ई-कॉमर्स, डिजिटल विपणन तथा सरकारी कौशल विकास एवं माटी कला प्रोत्साहन योजनाओं ने कुम्हारी कला में नए अवसर सृजित किए हैं। इन पहलों के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, उद्यमिता तथा सामाजिक पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में नई संभावनाएँ विकसित हुई हैं। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य पारंपरिक कुम्हारी कला में कार्यरत महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक स्थिति का विश्लेषण करना तथा यह समझना है कि पारंपरिक ज्ञान और समकालीन नवाचार उनके जीवन, कार्य-प्रक्रिया एवं आजीविका को किस प्रकार प्रभावित कर रहे हैं। यह अध्ययन महिला सशक्तिकरण, पारंपरिक शिल्प संरक्षण तथा सतत विकास के संदर्भ में महत्वपूर्ण निष्कर्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करेगा, जिससे कुम्हारी कला में कार्यरत महिलाओं की स्थिति को अधिक सम्मानजनक एवं सशक्त बनाने के लिए उपयोगी सुझाव प्राप्त हो सकें। प्रस्तुत अध्ययन गुणात्मक शोध दृष्टिकोण पर आधारित है,जिसमें वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध पद्धति का प्रयोग किया जाएगा। अध्ययन हेतु आवश्यक तथ्यों का संकलन क्षेत्रीय अध्ययन, प्रत्यक्ष अवलोकन तथा कुम्हारी कला से जुड़ी महिलाओं के साक्षात्कार के माध्यम से किया गया हैं।

मुख्य शब्द: पारंपरिक ज्ञान, समकालीन नवाचार, कुम्हारी कला, महिला सशक्तिकरण, महिला कलाकार, लोक शिल्प।

Page No - 232-238

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