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Special Edition- 2

VOL-2

​

 Abhinavdhara – IJIIS​

Explore the Special Edition-2 of Abhinavdhara (IJIIS) featuring peer-reviewed research articles on Indic Studies, Sanskrit, Indian Philosophy, and Culture.

 

SRIJANSHODH 2026

International conference on Indian Knowledge Systems, Art, Design, Wellness, and Cultural Heritage                 

 

Organised by ​

 Shabdārambh:

Global Academy of Art,Culture, Languages & Wellness Date: 29th & 30th August 2026 (virtual mode) 

भारतीय कला में दृश्य भाषा, प्रतीकवाद, शिल्प कौशल और सांस्कृतिक प्रतीकों का अध्ययन

महेंद्र प्रताप दिनकर, Ph.D. रिसर्च स्कॉलर
कॉलेज ऑफ़ फाइन आर्ट, तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद, इंडिया

डॉ. दीपक कुमार विश्वकर्मा (असिस्टेंट प्रोफेसर)
कॉलेज ऑफ़ फाइन आर्ट, तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद, इंडिया

संक्षेप (Abstract):

भारतीय कला दुनिया की एक समृद्ध धरोहर है, जिसमें चित्र, मूर्तियाँ, मंदिरों की नक्काशी और लोककला प्रमुख रूप से दिखाई पड़ते हैं। भारतीय कला की "दृश्य भाषा" से कला भाव, विचार और कहानी के बारे में जानकारी प्रस्तुत करती है। दृश्य भाषा में रंग, रूप, रेखा, बनावट और संरचना जैसे तत्व मिलकर दर्शक के साथ संवाद के साथ-साथ भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से भी अपना प्रभाव छोड़ती हैं। प्रतीकवाद भारतीय कला का एक केंद्रीय हिस्सा होने के साथ धार्मिक, दार्शनिक, सजावटी और सामाजिक अस्तित्व को प्रस्तुत की हैं, जैसे कि कमल शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है, गाय माता और स्तुति का प्रतीक के रूप में दिखाया गया हैं। बदलते समय के साथ इन प्रतीकों का अर्थ परिवर्तित हुआ, और किस तरह स्थानीय सामाजिक परंपरा और वैश्विक स्तर पर प्रतीकों की परिभाषा पर असर डाला। शिल्प कला की बनावट और तकनीक भारतीय कला का प्रमुख आयाम है। प्रस्तर और काष्ठ नक्काशी, कांस्य, टेराकोटा प्रतिमाएँ, लघु चित्रण की सूक्ष्म रेखाएँ, कपड़ा कला इन सभी कला में तकनीकी कुशलता और कारीगरी का विशाल स्तम्भ हैं। सांस्कृतिक स्तर पर त्यौहार, धार्मिक अनुष्ठान, लोककथाएँ और दैनिक जीवन इन विषयो को प्रतीकात्मक रूप में जन्म देती है, जो कला समाज की पहचान व मूल्यों को अलग-अलग स्थानों को संजोये रखने के साथ-साथ सामाजिक पदानुक्रम, राजनीतिक कथन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक आईना है। जैसे कि मंदिरो के दीवारों पर बनी भित्ति चित्र एवं मूर्तियाँ उस आध्यात्म की कथा का एक झलक प्रस्तुत करती है। भारतीय कला ऐतिहासिक और समकालीन दोनों स्तरों पर स्रोत एवं तकनीक का विश्लेषण कर कलाकारों क्र माध्यम से दृश्य भाषा एवं प्रतीकों के बदलते मूल्यों को भी देखता है, जो समाज की मनोगति, विश्वास और इतिहास को दृढ़ता से जानना है।

मुख्य शब्द: दृश्य भाषा, प्रतीकवाद, शिल्प कला, सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक तकनीक।

Page No- 55-62

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