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Special Edition- 2

VOL-2

​

 Abhinavdhara – IJIIS​

Explore the Special Edition-2 of Abhinavdhara (IJIIS) featuring peer-reviewed research articles on Indic Studies, Sanskrit, Indian Philosophy, and Culture.

 

SRIJANSHODH 2026

International conference on Indian Knowledge Systems, Art, Design, Wellness, and Cultural Heritage                 

 

Organised by ​

 Shabdārambh:

Global Academy of Art,Culture, Languages & Wellness Date: 29th & 30th August 2026 (virtual mode) 

भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में हिंदी साहित्य की भूमिका

डॉ. छाया
सहायक प्राध्यापिका (हिंदी विभाग)
कॉलेज: निरंकारी बाबा गुरबचन सिंह मेमोरियल महाविद्यालय, सोहना

भारत की सांस्कृतिक पहचान उसकी समृद्ध, बहुआयामी एवं दीर्घकालीन ज्ञान-परंपरा में निहित है। भारतीय ज्ञान-परंपरा केवल धार्मिक अथवा आध्यात्मिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दर्शन, साहित्य, भाषा, चिकित्सा, गणित, खगोलशास्त्र, योग, कला, संगीत, नीतिशास्त्र, लोक-जीवन, सामाजिक चिंतन तथा प्रकृति के साथ मानव के संबंध से संबंधित विविध प्रकार के ज्ञान का समावेश है। यह ज्ञान-संपदा विभिन्न माध्यमों के द्वारा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती रही है। भारतीय ज्ञान-परंपरा की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही है कि इसमें ज्ञान को केवल पुस्तकीय अथवा सैद्धांतिक विषय न मानकर जीवन-व्यवहार से जोड़ा गया। गुरु-शिष्य परंपरा, मौखिक परंपरा, लोकगीत, लोककथाएँ, धार्मिक आख्यान, महाकाव्य, पुराण तथा विभिन्न साहित्यिक विधाओं ने ज्ञान के संरक्षण एवं प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भारतीय ज्ञान-परंपरा, आध्यात्मिक, गुरु-शिष्य परंपरा, मौखिक परंपरा, लोकगीत, लोककथाएँ, धार्मिक आख्यान, महाकाव्य, पुराण

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