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An online refereed and peer reviewed journal

Special Edition- 2
VOL-2
Abhinavdhara – IJIIS
Explore the Special Edition-2 of Abhinavdhara (IJIIS) featuring peer-reviewed research articles on Indic Studies, Sanskrit, Indian Philosophy, and Culture.
SRIJANSHODH 2026
International conference on Indian Knowledge Systems, Art, Design, Wellness, and Cultural Heritage
Organised by
Shabdārambh:
Global Academy of Art,Culture, Languages & Wellness Date: 29th & 30th August 2026 (virtual mode)
बनारस घाट को चित्रित करने वाले प्रमुख भारतीय चित्रकारों का अध्ययन
सतीश कुमार पटेल, शोध छात्र, चित्रकला विभाग , दृश्य कला संकाय, बी एच यू
https://doi.org/10.67754/ijiis.special.edi 2.vol02.002
परिचय –
काशी या वाराणसी जो बनारस के भी नाम से प्रसिद्ध है। यह दुनिया के प्राचीन नगरों में से एक माना जाता हैं जिसका उल्लेख हमें जातक कथा, अथर्ववेद, रामायण, महाभारत, स्कंदपुराण, हरिवंशपुराण व चीनीयात्री ह्वेनसांग, फ़ाययान के द्वारा भी मिलता है। यहां पर गौतम बुद्ध, पार्श्वनाथ, महावीर, तुलसीदास, कबीर जैसे अनेक विद्वानों ने अपने ज्ञान का परिचय दिये हैं। बनारस एक शहर ही नहीं बल्कि अपनी सांस्कृतिक (धर्म व मोक्ष का केंद्र), धर्मिक (शिव की नगरी) तथा आध्यात्मिक (आत्मिक मुक्ति व पूजा पाठ) गहराई के लिए विश्वभर में महत्वपूर्ण माना जाता हैं। बनारस में गंगा नदी के तट पर कुल 84 घाटों(मंदिर, सीढ़ी, भवन) की श्रृंखला अनेकों राजाओं ने धार्मिक विश्वास के साथ राजसी विजय स्वरूप में बनवाए। यहां ईश्वरीय शक्ति का संचरण आस्था, मंदिरों के रूप में होता हैं। वाराणसी की अद्भुत विरासत देखने के लिए 19वी शताब्दी में कंपनी शैली व्यापार के रूप में आई, जिनके साथ विद्वान, चित्रकार, खोजकर्ता, शोधकर्ता एवं अन्य यात्री आये। विदेशी चित्रकार विलियन होर्सेज, थामस डैनियल एवं एडवर्ड लियर ने बनारस घाट की नित्य क्रिया-कलापों को देख प्रभावित होकर अनेको रंगीन चित्र, छायांकन बनाये, तथा जेम्स प्रिंसेप ने लिथोप्रिंट द्वारा बनारस घाट के वास्तविक स्वरूप का आध्यात्मिक अभिव्यक्ति दर्शन श्याम - श्वेत में लाइन ड्राइंग से कराते हैं। भारत में बनारस घाट का शुरुआती दौर के उम्रदार चित्रकारो में नन्द लाल बोस, विनोद बिहारी मुखर्जी, यन.यश. बेंद्रे, यम. एफ. हुसैन, इंद्र कुमार दुगर ने बनारस घाट को अपने यथार्थ रूपों के साथ आध्यात्मिक स्वरूपों में चित्रण किये। इन चित्रकारों के पश्चात बनारस घाट चित्रों को सर्वाधिक ख्याति रामकुमार ने दिलाई, जो एक लेखक भी थे। इनके चित्र में अमूर्त व ज्यामिति दोनों रूपों का समावेश तैल रंगों से बने घाट की सीढ़ियां, गंगा के पानी पर नाव, पेड़ो में दिखते हैं। दिलीप दास गुप्ता ने जलरंग से शांत वातावरण व मनु पारेख ने चमचमाती रंग, आंभगिक रेखाओं द्वारा चित्र बनाएं। फिर विजय सिंह ने बनारस घाट को श्याम- स्वेत रंगों द्वारा रहस्यवादी अमूर्त शैली में कार्य किए। इनके चित्रण में श्याम रंग को लगाने का इतना सटीक, कॉन्फिडेंस है कि उतना रामकुमार और हुसैन को नहीं हुआ होगा। यस. प्रणाम के. सिंह, दीप्ति प्रकाश मोहंती, संतोष सिंह के साथ परेश मैती की कलाकृति में नीलकाल जैसा तेज चमक आभा दिखाई देता है। तापस घोषाल के समकालीन रहे परमेश पाल ने काल्पनिक नंदी कैनवास पर चमकीले रंग से बनाकर बनारस घाट का नया दर्शन करवाये। और अमित भर त्रिआयामी मूर्ति समान बनारस घाट को प्रकाश से आकर्षक करने लगे। आनंददास, संदीप छत्रबंद, सोमनाथ बोथ, सतीश खन्ना, नाना साहेब जैसे सभी चित्रकार को बनारस घाट चित्रण करते समय उन्हें निराकार एव साकार रूप दिखाई पड़ता हैं जहां बनारस घाट पर कर्म और मोक्ष दोनों के दर्शन होते हैं।
Keywords: वाराणसी, रंगों से बने घाट, नीलकाल, आंभगिक रेखा, त्रिआयामी मूर्ति
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