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Special Edition- 2

VOL-1​

​

 Abhinavdhara – IJIIS​

Explore the Special Edition-2 of Abhinavdhara (IJIIS) featuring peer-reviewed research articles on Indic Studies, Sanskrit, Indian Philosophy, and Culture.

 

SRIJANSHODH 2026

International conference on Indian Knowledge Systems, Art, Design, Wellness, and Cultural Heritage                 

 

Organised by ​

 Shabdārambh:

Global Academy of Art,Culture, Languages & Wellness Date: 29th & 30th August 2026 (virtual mode) 

दृश्य कथाओं का भारतीय कला में योगदान: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

डॉक्टर वर्षा रानी
असिस्टेंट प्रोफेसर - विभागाध्यक्ष- चित्रकला
हर्ष विद्या मंदिर ( पी.जी) कॉलेज रायसी हरिद्वार ,उत्तराखंड

सार
सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक तथा सामाजिक चेतना के संरक्षण और संवहन का एक सशक्त माध्यम रही हैं। प्रागैतिहासिक शैलचित्रों से लेकर अजंता, बाघ, सांची, एलोरा, राजस्थानी, मुगल, पहाड़ी तथा विविध लोक एवं जनजातीय कला परंपराओं तक दृश्य कथाओं ने भारतीय समाज के जीवन-मूल्यों, धार्मिक आस्थाओं, लोकविश्वासों, ऐतिहासिक घटनाओं तथा सांस्कृतिक विरासत को प्रभावी रूप से अभिव्यक्त किया है। दृश्य कथाएँ केवल सौंदर्यबोध की अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ज्ञान, परंपरा एवं नैतिक मूल्यों के पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण का भी महत्वपूर्ण साधन हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र में भारतीय दृश्य कथाओं की अवधारणा, ऐतिहासिक विकास, कलात्मक स्वरूप तथा भारतीय कलाओं में उनके बहुआयामी योगदान का विवेचनात्मक अध्ययन किया गया है। अध्ययन में गुणात्मक एवं वर्णनात्मक शोध पद्धति का उपयोग करते हुए ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक स्रोतों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि समकालीन डिजिटल युग में दृश्य कथाएँ एनिमेशन, ग्राफिक डिज़ाइन, डिजिटल चित्रण तथा अन्य दृश्य माध्यमों के माध्यम से नए आयाम प्राप्त कर भारतीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन तथा वैश्विक प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अतः दृश्य कथाएँ भारतीय सांस्कृतिक पहचान, कलात्मक निरंतरता तथा सृजनात्मक अभिव्यक्ति की है।

कूँजी शब्द: दृश्य कथाएँ, भारतीय कला, लोक कला, सांस्कृतिक विरासत, दृश्य संचार, ग्राफिक डिज़ाइन, एनिमेशन, डिजिटल कला, भारतीय परंपरा, कला इतिहास।

Page No- 228-231

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सार
सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक तथा सामाजिक चेतना के संरक्षण और संवहन का एक सशक्त माध्यम रही हैं। प्रागैतिहासिक शैलचित्रों से लेकर अजंता, बाघ, सांची, एलोरा, राजस्थानी, मुगल, पहाड़ी तथा विविध लोक एवं जनजातीय कला परंपराओं तक दृश्य कथाओं ने भारतीय समाज के जीवन-मूल्यों, धार्मिक आस्थाओं, लोकविश्वासों, ऐतिहासिक घटनाओं तथा सांस्कृतिक विरासत को प्रभावी रूप से अभिव्यक्त किया है। दृश्य कथाएँ केवल सौंदर्यबोध की अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ज्ञान, परंपरा एवं नैतिक मूल्यों के पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण का भी महत्वपूर्ण साधन हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र में भारतीय दृश्य कथाओं की अवधारणा, ऐतिहासिक विकास, कलात्मक स्वरूप तथा भारतीय कलाओं में उनके बहुआयामी योगदान का विवेचनात्मक अध्ययन किया गया है। अध्ययन में गुणात्मक एवं वर्णनात्मक शोध पद्धति का उपयोग करते हुए ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक स्रोतों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि समकालीन डिजिटल युग में दृश्य कथाएँ एनिमेशन, ग्राफिक डिज़ाइन, डिजिटल चित्रण तथा अन्य दृश्य माध्यमों के माध्यम से नए आयाम प्राप्त कर भारतीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन तथा वैश्विक प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अतः दृश्य कथाएँ भारतीय सांस्कृतिक पहचान, कलात्मक निरंतरता तथा सृजनात्मक अभिव्यक्ति की है।

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