ISSN NUMBER – 2583-5149 | +91 9818244235 | abhinavdharajournal@gmail.com
An online refereed and peer reviewed journal

Special Edition- 2
VOL-1
Abhinavdhara – IJIIS
Explore the Special Edition-2 of Abhinavdhara (IJIIS) featuring peer-reviewed research articles on Indic Studies, Sanskrit, Indian Philosophy, and Culture.
SRIJANSHODH 2026
International conference on Indian Knowledge Systems, Art, Design, Wellness, and Cultural Heritage
Organised by
Shabdārambh:
Global Academy of Art,Culture, Languages & Wellness Date: 29th & 30th August 2026 (virtual mode)
भारतीय संस्कृति एवं लोकगीतों की परम्परा से पोषित कला में नवाचारः चित्रकार रामशब्द सिंह के विशेष संदर्भ में.
शबाहत,
शोधाथीर्ः ड्राइंग एवं पेंटिंग विभाग,रघुनाथ ग़र्ल्स पी.जी कॉलेज मेरठ
प्रोफेसर अर्चना रानी,
विभागाध्यक्षाः ड्राइंग एवं पेंटिंग विभाग, रघुनाथ ग़र्ल्स पी.जी कॉलेज मेरठ
सारांशः
प्रस्तुत शोध-पत्र के अन्तर्गत समकालीन लोक चित्रकार रामशब्द सिंह अपनी चित्रकृतियों में भारतीय लोक जीवन, संस्कृति, विश्वास, सामाजिक जीवन तथा लोक परम्पराओं को लोकगीतों के रूप में प्रयोग करके अपनी अभिव्यक्ति प्रदान की। उनकी कलाकृतियों में अंकित लोकगीत केवल शब्दों के रूप में उपस्थित नहीं हैं, अपितु वह चित्र के भाव को, कथाओं को और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हैं। चित्र एवं लोकगीत का यह समन्वय दर्शकों को लोक-जीवन की संवेदनाओं, सामूहिक स्मृतियों और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ता है। समकालीन चित्रकार रामशब्द सिंह की कला में लोक चित्रों के साथ लोकगीत भारतीय लोक संस्कृति को एक नवीन परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करते हैं। राम शब्द सिंह की कला या चित्रों में भारतीय लोक संस्कृति की अभिव्याक्ति का उदाहरण प्रदान करती है। उन्होंने अपने चित्रों में लोक गीतों को केवल सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में ही नही अपितु लोक जीवन की मूल जावनाओं एवं अभिव्यक्ति की है रामशब्द सिंह के चित्रों में धार्मिक , विवाह, जन्म उत्सवों पर गाए गये चित्रों का जो समन्वय समकालीन कला के साथ मिलता है वह नवीनताय के साथ भारतीय परम्परा एवं संस्कृति का संवाहक है। उनकी कला प्राचीन परम्परा एवं आधुनिकता को जोड़ने के कार्य करती है। लोकगीत भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं, जो समय के परिवर्तन के बावजूद आज भी लोकजीवन की पहचान, सांस्कृतिक निरंतरता तथा सामाजिक एकता को सुदृढ़ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।रामशब्द सिंह की चित्रकृतियों में लोकगीतों की अभिव्यक्ति, उनके प्रतीकात्मक महत्व तथा समकालीन भारतीय कला में उनके योगदान का अध्ययन किया गया है।
शब्द संकेतः लोकगीत, लोककला, परम्परा, समकालीन कला, लोक अभिव्यक्ति, संस्कृति ।
Page No- 19-26
https://doi.org/10.67754/ijiis.special.edi 2.vol01.002
सारांशः
प्रस्तुत शोध-पत्र के अन्तर्गत समकालीन लोक चित्रकार रामशब्द सिंह अपनी चित्रकृतियों में भारतीय लोक जीवन, संस्कृति, विश्वास, सामाजिक जीवन तथा लोक परम्पराओं को लोकगीतों के रूप में प्रयोग करके अपनी अभिव्यक्ति प्रदान की। उनकी कलाकृतियों में अंकित लोकगीत केवल शब्दों के रूप में उपस्थित नहीं हैं, अपितु वह चित्र के भाव को, कथाओं को और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हैं। चित्र एवं लोकगीत का यह समन्वय दर्शकों को लोक-जीवन की संवेदनाओं, सामूहिक स्मृतियों और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ता है। समकालीन चित्रकार रामशब्द सिंह की कला में लोक चित्रों के साथ लोकगीत भारतीय लोक संस्कृति को एक नवीन परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करते हैं। राम शब्द सिंह की कला या चित्रों में भारतीय लोक संस्कृति की अभिव्याक्ति का उदाहरण प्रदान करती है। उन्होंने अपने चित्रों में लोक गीतों को केवल सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में ही नही अपितु लोक जीवन की मूल जावनाओं एवं अभिव्यक्ति की है रामशब्द सिंह के चित्रों में धार्मिक , विवाह, जन्म उत्सवों पर गाए गये चित्रों का जो समन्वय समकालीन कला के साथ मिलता है वह नवीनताय के साथ भारतीय परम्परा एवं संस्कृति का संवाहक है। उनकी कला प्राचीन परम्परा एवं आधुनिकता को जोड़ने के कार्य करती है। लोकगीत भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं, जो समय के परिवर्तन के बावजूद आज भी लोकजीवन की पहचान, सांस्कृतिक निरंतरता तथा सामाजिक एकता को सुदृढ़ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।रामशब्द सिंह की चित्रकृतियों में लोकगीतों की अभिव्यक्ति, उनके प्रतीकात्मक महत्व तथा समकालीन भारतीय कला में उनके योगदान का अध्ययन किया गया है।

.png)