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श्रीमद् भगवद् गीता : जीवन और कार्य के लिए व्यवहारिक मार्गदर्शिका

डॉ. मंजुला जे. वीरडिया

एसोसिएट प्रोफेसर

श्रीमती ए पी पटेल आर्ट्स एन्ड स्व. श्री एन.पी.पटेल कॉमर्स कॉलेज,नरोडा

अहमदाबाद, गुजरात

Publication Type  -   Journal Article

Publication Year    -   2026

Journal Name   -   Abhinavdhara Journal

Volume/ Issue  -    Special Issue-Vol -2

Pagination -            153-159

Article Type   -       Research Paper

सारांश

श्रीमद् भगवद् गीता भारतीय ज्ञान-परंपरा का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण दार्शनिक ग्रंथ है, जो मानव जीवन के नैतिक, मानसिक, आध्यात्मिक तथा व्यावहारिक पक्षों का समन्वित मार्गदर्शन प्रस्तुत करता है। यह ग्रंथ महाभारत के युद्धक्षेत्र में उत्पन्न अर्जुन-विषाद के समाधान के माध्यम से मनुष्य के आंतरिक संघर्षों का समाधान करता है। आधुनिक युग में व्यक्ति कार्य-दबाव, मानसिक तनाव, नैतिक द्वंद्व तथा उद्देश्यहीनता जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में गीता का कर्मयोग, निष्काम कर्म, समत्वबुद्धि तथा आत्मज्ञान आधारित दर्शन जीवन और कार्य दोनों के लिए एक व्यवहारिक मार्गदर्शिका सिद्ध होता है। इस शोधपत्र का उद्देश्य गीता के प्रमुख सिद्धांतों का अकादमिक विश्लेषण करते हुए उसकी समकालीन प्रासंगिकता को स्पष्ट करना है।

 

मुख्य शब्द: श्रीमद् भगवद् गीता, कर्मयोग, निष्काम कर्म, समत्वबुद्धि,जीवन-दर्शन, कार्य-संस्कृत, मार्गदशीका ।

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