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भारतीयज्ञान परंपरा की दृष्टि से श्रीमद्भगवद्गीता और उपनिषदों का दार्शनिक विश्लेषण

अंकित कुमार पाण्डेय

शोध छात्र

संस्कृत विभाग

दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली

Publication Type  -   Journal Article

Publication Year    -   2026

Journal Name   -   Abhinavdhara Journal

Volume/ Issue  -    Special Issue-Vol -2

Pagination -            120-124

Article Type   -       Research Paper

सारांश 

भारतीय ज्ञान परंपरा में श्रीमद्भगवद्गीता और उपनिषद् का स्थान अत्यंत केंद्रीय एवं आधारभूत है। प्रस्तुत शोधपत्र में इन दोनों ग्रंथों का दार्शनिक विश्लेषण भारतीय ज्ञान परंपरा की दृष्टि से किया गया है। उपनिषदों को वेदान्त के रूप में ब्रह्म, आत्मा, जगत् एवं मोक्ष के गूढ़ तत्त्वों का प्रतिपादक माना गया है, जहाँ आत्म-ब्रह्म ऐक्य और ज्ञानमार्ग की प्रधानता है। दूसरी ओर, श्रीमद्भगवद्गीता इन्हीं औपनिषदिक सिद्धान्तों को व्यवहारिक जीवन, कर्म, नैतिकता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ती है।

शोध में यह स्पष्ट किया गया है कि उपनिषद जहाँ दार्शनिक गहराई प्रदान करते हैं, वहीं गीता उस ज्ञान को जीवनोपयोगी बनाती है। गीता का विशेष योगदान कर्मयोग, भक्तियोग एवं ज्ञानयोग के समन्वय में निहित है, जो मानव जीवन के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। साथ ही, गीता में निर्गुण एवं सगुण ब्रह्म की एकता तथा निष्काम कर्म का सिद्धान्त भारतीय दर्शन को व्यावहारिक और सार्वभौमिक बनाता है।

अतः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि उपनिषद् और श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय ज्ञान परंपरा के दो पूरक आयाम हैं, जो तत्त्वज्ञान और व्यवहारिक जीवन के मध्य सेतु का कार्य करते हैं तथा मानव जीवन के आध्यात्मिक एवं नैतिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्य शब्द-भारतीय ज्ञान परंपरा, उपनिषद्, श्रीमद्भगवद्गीता, ब्रह्म, आत्मा, मोक्ष, कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग, अद्वैत दर्शन, निष्काम कर्म, ब्रह्मात्मैक्य

Chief Editor Contact

Dr Supriya Sanju

Adjunct Professor, Department of Indian Knowledge & Languages

Gurugram University Gurugram

Phone: 9818244235 Email id: supriyasanju@gmail.

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