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गीता में मानवता

डॉ. प्रवीण पाठक

असिस्टेंट प्रोफेसर

इतिहास विभाग

स्टारेक्स यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम

Publication Type  -   Journal Article

Publication Year    -   2026

Journal Name   -   Abhinavdhara Journal

Volume/ Issue  -    Special Issue-Vol -2

Pagination -            103-108

Article Type   -       Research Paper

सारांश

श्रीमद्भागवत गीता यह एक ग्रंथ ही नहीं अपितु अपने आप में जीवनपुंज है। जीवनपुंज अर्थात जीवन को प्रकाशित करने का एक व्यवस्थित स्त्रोत हैं। आज की व्यावहारिक जीवनशैली में जो भाव, जो उद्देश्य चाहिए वो सम्पूर्ण रूप से इस ग्रंथ में परिभाषित है। व्यक्ति की कार्य को लेकर एवं कार्य को निर्धारित करने वाली हर वो प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष परिस्थिति की परिभाषा एवं उद्देश्य इसमे पाया जा सकता है। कर्म, धर्म मे निहित है या धर्म, कर्म में निहित है इन विरोधाभासों को भी गीता हल करती है । कथा- प्रवचनों से लेकर घर-घर तक जीवन-सुधार परक उपदेश, नीति-नियमों का जो भी ज्ञान दिया जाता है, उसमें गीता का प्रकाश कहीं न कहीं अवश्य पड़ता है। महाभारत से पूर्व शंका एवं त्रुटियों से भरा अर्जुन कैसे अपने कर्म और धर्म के भेद को समझ पाये। इसी परिलक्ष्य में श्रीकृष्ण द्वारा स्वरचित और कंठित इस 18 अध्याय वाली महागीत को गीता के रूप में हम सभी नमन करते हैं। आज मानव स्वयं से लड़ रहा है और सही-गलत, अच्छा-बुरा भेद कर पाना दुर्गम है क्योंकि आज कोई भी चरित्र किस पाले में आता है इसका निर्णय करना अत्यंत कठिन है  गीता, महाभारत की परिस्थिति में ही नहीं बल्कि आज की परिस्थिति में भी बहुत उपयोगी है। आज हम सभी उस अर्जुन की तरह जीवन रूपी महाभारत के समक्ष हैं परंतु आज श्री कृष्ण अपने रूप में भले ही न हों परंतु स्वर और ज्ञान स्त्रोत हमारे पास उपलब्ध हैं। दूसरे अध्याय की कर्म परिभाषा से लेकर मोक्षप्राप्ति के मार्गों का विश्लेषण करने वाले अंतिम अध्याय तक , गीता जीवन के हर पहलू को स्पर्श करती है । हम आज जिन आसक्तियों से घिरे हैं मोह, बंधन, विलास, भोग, पाखंड, ईर्ष्या, लोभ, इनके प्रमुख हैं और गीता के छठे, चौदहवें एवं सोलहवे अध्याय इतनी बारीकी से इसपर अध्ययन करते हैं कि कोई गूढ़ विचारक भी पढ़ने पर आश्चर्यचकित एवं अभिभूत हो जाये।

विशेषकर कई पश्चिमी एवं गैर भारतीय चिंतक जो गीता से अनिभिज्ञ हैं वो जब गीता का पाठ करते हैं तब उनकी वैचारिक सुंदरता और भी बढ़ जाती है।

मुख्य शब्द- गीता, मानवता, श्रीकृष्ण, कर्मयोग, महाभारत

Chief Editor Contact

Dr Supriya Sanju

Adjunct Professor, Department of Indian Knowledge & Languages

Gurugram University Gurugram

Phone: 9818244235 Email id: supriyasanju@gmail.

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