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गीता के संवाद पर आधारित संचार की अवधारणा: एक अंतःविषयक समीक्षा

प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार

तिलक स्कूल ऑफ़ जर्नलिज़्म एंड मास कम्युनिकेशन

चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, मेरठ।

श्रीमती शैली शर्मा

रिसर्च स्कॉलर

तिलक स्कूल ऑफ़ जर्नलिज़्म एंड मास कम्युनिकेशन

चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, मेरठ।

Publication Type  -   Journal Article

Publication Year    -   2026

Journal Name   -   Abhinavdhara Journal

Volume/ Issue  -    Special Issue-Vol -2

Pagination -            58-78

Article Type   -       Research Paper

सारांश

श्रीमद्भगवद्गीता को आमतौर पर एक धार्मिक एवं दार्शनिक ग्रंथ माना जाता है, किंतु इसके संवादात्मक स्वरूप में निहित संचार की अवधारणाएँ इसे एक प्रभावी संप्रेषणात्मक ग्रंथ के रूप में भी स्थापित करती हैं। यह शोध-पत्र श्रीकृष्ण और अर्जुन के मध्य संवाद को संचार की एक संपूर्ण, नैतिक और परिवर्तनकारी प्रक्रिया के रूप में समझने का प्रयास करता है। प्रस्तुत अध्ययन एक अंतःविषयक समीक्षा है, जिसमें दर्शन, संचार अध्ययन, मनोविज्ञान, नैतिकता, नेतृत्व और प्रबंधन से संबंधित विद्वानों के विचारों का समालोचनात्मक विश्लेषण किया गया है। साहित्य समीक्षा के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि गीता का संवाद केवल सूचना के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह श्रोता की मानसिक स्थिति, नैतिक दुविधाओं और सामाजिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए एक गहन परिवर्तन प्रक्रिया को उत्पन्न करता है। विभिन्न विद्वानों के अध्ययन यह दर्शाते हैं कि गीता का संवाद प्रेरणादायक, नैतिक और उद्देश्यपूर्ण संचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें वक्ता और श्रोता के बीच पारस्परिक विश्वास, तर्कशीलता और मूल्यबोध की सशक्त उपस्थिति देखी जाती है। यह समीक्षा यह भी सिद्ध करती है कि गीता में निहित संवादात्मक संरचना आधुनिक सामाजिक और शैक्षणिक संदर्भों में नेतृत्व, निर्णय-निर्माण, परामर्श और नैतिक विवेक के विकास में बहुत प्रभावी साबित हो सकती है। निष्कर्षतः यह शोध स्थापित करता है कि श्रीमद्भगवद्गीता का संवाद एक सार्वभौमिक संचार दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जो केवल आध्यात्मिक चेतना तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय व्यवहार, सामाजिक समरसता और नैतिक जीवन-दर्शन को भी मजबूत करता है।

मुख्य शब्द: श्रीमद्भगवद्गीता, संवाद, संचार की अवधारणा, अंतःविषयक समीक्षा, नैतिक संचार, नेतृत्व संवाद

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